Rat Race से बाहर कैसे निकले ?

RAT RACE जिसका हिंदी अर्थ है – चूहा दौड़, इस पोस्ट में हम दो चीज जानेगे,

पहला – RAT RACE की प्रॉब्लम में किस तरह से हम में से ज्यादा फसते जा रहे है, और

दूसरा – इस RAT RACE से बाहर कैसे निकला जाये ?

The “Rat Race” Problem

अगर आप आप अपने मन में, अपने आस पास के कीसी भी आदमी के लाइफ को ध्यान से देखे तो, हम सबकी लाइफ का कुछ एक जैसा ही पैटर्न देखने को मिलेगा,

हर आदमी एक दिन बच्चा होता है, छोटा बच्चा स्कूल जाता है, और बड़ा होने पर कॉलेज या डिग्री की पढाई पूरी करता है, फिर पढ़ाई पुरी करने के बाद उसके पास तीन विकल्प होते है – सरकारी नौकरी, प्राइवेट नौकरी या फिर बिज़नस,

सरकारी नौकरी या बिज़नस सिर्फ 5 से 10% लोग ही कर पाते है,

बाकी 90% लोग प्राइवेट नौकरी से ही शुरू करते है, और हम में से कुछ लोग तो ऐसे भी होते है, जो बेचारे अच्छी खासी पढाई लिखाई करने के बावजूद भी बेरोजगार ही रह जाते है,

अब चाहे हम नौकरी करे या बिज़नस, हमारा मुख्य मकसद होता है – ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना, और आर्थिक सफलता हासिल करना, ताकि हम अपनी मंपसद मस्त लाइफ जी सके और अपने सपनो को पूरा कर सके,

Important Question-

अब आप थोड़ा रुकिए और मेरे एक प्रश्न का उत्तर दीजिए –

क्या लगता है आपको ? आखिर हम में से कितने प्रतिशत लोग ऐसे होते है , जो नौकरी या बिज़नस शुरू करने के बाद वैसी लाइफ जी पाते है, जैसा हम अपनी कॉलेज लाइफ के वक्त सोचते है ?

दोस्तों, इस सवाल का जवाब और जवाब के पीछे की असली सच्चाई को समझना बहुत इम्पोर्टेन्ट है ,

मेरा विस्वाश है कि – अगर आप इन सवालों के बारे में गंभीरता से सोचते है, तो आप इस सच्चाई को देख पाएंगे कि – इतने सारे लोगो में, बहुत ही कम, और सच कहे तो ,शायद ही हम में से कोई ,ऐसा आदमी होता है, जो अपनी लाइफ को, अपनी शर्तो पर जी पाता है,

वर्ना कहावत ये है कि – जीवन एक संघर्ष है, और जीवन के इस मोड़ पर , हम में से ज्यादातर लोगो का जीवन एक कभी खत्म न होने वाले फाइनेंसियल संघर्ष से भर जाता है,

हम में से ज्यादतर लोग अपनी और अपनी फैमली की जरुरतो और जिमेदारियो के बोझ तले दबकर अपनी  नौकरी, और अपने बिज़नस में इस कदर बिजी हो जाते है कि –

अपने और अपने उन सपनो के बारे में सोचना  बहुत मुर्खतापूर्ण लगता है – जो सपने कभी स्कूल और कॉलेज के समय बार बार सोचा करते थे,

और अगर आप थोडा और दूर तक देखे, तो तो आप शायद इस सच्चाई को देख पाएंगे कि – मेजोरिटी ऑफ़ पीपल यानि हम सभी लगभग एक तरह की सिचुएशन में होते है –

हम रोज सुबह उठते है, और चाहे काम पर जाने का मन हो या नहीं लेकिन काम पर जाते है, और महिना पूरा होने पर सैलरी मिलती है, और फिर कुछ दिन तक सब ठीक लगता है,

कुछ जरूरते तो पूरी हो जाती है, लेकिन खर्च करने के लिए, सैलरी चाहे कितनी भी ज्यादा हो, हमेशा कम पड़ जाती है, और हमारे और बीवी बच्चो की बहुत सारी ख्वाहिशे हमेशा अधूरी रह जाती है,

और इसी बीच हमारे सामने आती है कुछ बैंकिंग और फाइनेंस यानि लोंन देने वाली कंपनीया, जो हमारे सभी अधूरी खवाहिशे और अधूरे सपनों को पूरा करने का वादा करती है –

और इसके लिए कभी वे क्रेडिट कार्ड का ऑफर देती है तो कभी पर्सनल लोन, और हम ख़ुशी ख़ुशी इन ऑफर्स को स्वीकार करते है,  

इसके बाद अगर बाइक लेनी है तो बाइक लोन,कार लेनी है तो कार लोन, और अगर घर लेने का सपना है तो होम लोन,

और जब तक हमारी सैलरी में लोन की क़िस्त फिट बैठती है तब तक लगभग हर सपने को पूरा करने के लिए कोई न कोई तो लोन मिल ही जाता है –

और फिर लोन लेकर, सपने पूरा करने के चक्कर में, नौकरी या बिज़नस शुरू करने के कुछ सालो बाद, होता ये है कि – हमारी जिदंगी का सबसे बड़ा खर्च बन जाता है –

बैंक लोनस की EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल, जो शायद ही कभी हमारा पीछा छोड़ता है,

और फिर एक बार जब कोई आदमी, अपने सपनो को पूरा करने के चक्कर में कर्ज, EMI, और क्रेडिट कार्ड के जाल में फ़स जाता है, तो अब  उस आदमी के पास पीछे जाने का कोई रास्ता नहीं होता,

उस आदमी के पास अपने दिल पे पत्थर रख कर, सिवाय रोज उठने और काम पर जाने के आलावा, और कोई विकल्प नहीं होता,

और आदमी जब इस तरह की सिचुएशन में फ़स जाता है, जब वो घर से ऑफिस, और ऑफिस से घर, के आलावा कुछ नहीं कर पाता, हालाँकि मेहनत तो बहुत कम करता है लेकिन उस मेहनत के बदले उसे जो चाहिए होता है वो उसे कभी नहीं मिल पाता, और धीरे धीरे वह आदमी जिन्दगी के असली आनंद को भूल ही जाता है,

तो किसी आदमी के, इस तरह की सिचुएशन, में फ़सने की दशा को ही, रैट रेस यानी चूहा दौड़ कहा जाता है,

दोस्तों, चाहता तो हम में से कोई भी नहीं है कि – हम इस तरह की सिचुएशन यानी रैट रेस या चूहा दौड़ में फसे ? और लाइफ एक लिमिटेड जगह में ही फिक्स्ड हो जाये,

लेकिन एक कडवी सच्चाई यानि हार्ड ट्रुथ यही है कि आज हम में से ज्यादातर लोगो के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है…..

अब सवाल ये है कि –ऐसा क्यों होता है, क्यों हम रैट रेस में फसते है और आखिर हम इस रैट रेस से बाहर कैसे निकल सकते है ?

The “Rat Race” – Solution

आइए , अब बात करते है – उन कारणों के बारे में, जिसके कारण हम इस तरह की सिचुएशन और रैट रेस में फस जाते है,

वैसे तो रैट रेस में फ़सने और फाइनेंसियल प्रॉब्लम के बहुत सारे कारण हो सकते है, लेकिन सच कहे तो फाइनेंसियल प्रॉब्लम में फसने का सबसे बड़ा कारण है –

फाइनेंसियल नॉलेज की कमी , यानी आर्थिक शिक्षा का अभाव,

होता ये है कि – चाहे हमारे माँ बाप हो या हमारे स्कूल टीचर, सभी लोग स्कूल के अलग अलग विषयों के बारे में पढने लिखने और उसमे एक्सपर्ट बंनने की सलाह जरुर देते है,

लेकिन कोई भी आर्थिक शिक्षा के महत्व पे जोर नहीं देता, और इस वजह से हम कभी नहीं समझ पाते है कि – वास्तव में पैसा कैसे काम करता है,

किस तरह से कोई पैसे के लिए काम करने वाला गुलाम बन जाता है,

और किस तरह कोई मालिक बनकर पैसे से अपने लिए काम करवा सकता है?

और इस तरह फाइनेंसियल एजुकेशन के आभाव में होता ये है कि –

कम आर्थिक समझ के कारण हम सभी कुछ न कुछ गलत फाइनेंसियल डिसीजन ले लेते है, और फिर जब बहुत देर हो जाती है, और जब हम कर्ज के जाल और फाइनेंसियल प्रॉब्लम में फ़स चुके होते है, तो समझ आता है कि – हमने क्या गलत किया था,

आर्थिक शिक्षा यानि फाइनेंसियल एजुकेशन की कमी ही वो सबसे बड़ा कारण है, जिसकी वजह से हम में से ज्यादातर लोग एक रैट रेस यानि चूहा दौड़ में फ़स जाते है, और फाइनेंसियली अपनी लाइफ को बहुत संघर्षमय बना लेते है,

अब बात करते है कि – आखिर ऐसी सिचुएशन में क्या किया जाये ? और कैसे इस तरह फाइनेंसियल प्रॉब्लम और रैट रेस में फसने से कैसे बचा जाये ?

प्रॉब्लम और उसका जवाब,

किसी भी प्रॉब्लम का असली हल उस प्रॉब्लम के कारण में छुपा होता है, अगर आप समस्या के असली कारण को समझ लेते है, तो किसी भी प्रॉब्लम का हल निकालना बहुत आसान हो जाता है,

और जैसे हमने देखा फाइनेंसियल प्रोब्लेम्स, और रैट रेस यानि चूहा दौड़ में फसने का कारण है,

आर्थिक शिक्षा की कमी यानि फाइनेंसियल एजुकेशन का आभाव,

तो अगर, किसी तरह हम अपनी अपनी आर्थिक समझ को बढ़ा ले, और अपने आपको फाइनेंसियली educate कर ले, तो निश्चित तौर पर हम रैट रेस से बाहर निकल सकते है,

और इस लिए आप सभी को मेरी सलाह है कि – आप अपने आपको हमेशा अधिक से अधिक फाइनेंसियली educate करने की कोशिस करते रहे, जहा से भी हो सकता है आर्थिक ज्ञान हासिल करते रहे,

क्योकि पैसे का असली ज्ञान मार्केट में होता है, सड़क पर होता है, इसलिए इस बाजार से, और इस सड़क पर चलते चलते पैसे के बारे में सीखते रहे और अपनी आर्थिक समझ को बढ़ाते रहे,

और जब भी पैसे के बारे में, कोई भी  फैसला लेना हो, तो उस वक्त दिल से नहीं, बल्कि दिमाग से सोचे,

जैसे – अगर किसी को उधार देना हो, या किसी तरह का उधार , या लोन लेना हो , और जब कुछ खर्च करना हो तब दिल से नहीं बल्कि दिमाग से सोचे,

इसके आलावा कोई भी निवेश करना हो, तो हमेशा अपने दिमाग का उपयोग ही करे,

कहने का मतलब है – फाइनेंसियल प्रॉब्लम से बचने के अपने आपको फाइनेंसियली EDUCATE करते रहे, मार्केट में हो रहे बदलवाओ को समझे, तेजी और मंदी को समझे, बुरे समय के लिए प्लान करे, और पैसे के मामले में दिल से कभी न सोचे, और किसी भी तरह का लेंन देंन किसी और के भरोसे भावनाओ में बहकर न करे,

अब एक और इम्पोर्टेन्ट सवाल ये आता है कि –

अपने आपको फाइनेंसियली educate कैसे करे और आर्थिक समझ को कैसे बढ़ाये,

तो दोस्तों, इसके दो जवाब है,

पहला – आप जहा से भी जितना हो सकता है, पैसे से जुड़े विषय और फाइनेसीयल टॉपिक के ऊपर लगातार सीखते रहे, जितना पॉसिबल हो उतनी किताबे पढ़े,  ऑडियो बुक सुने, इन्टरनेट पर ब्लॉग पढ़े, yotube पर विडियो देखे, बहुत कुछ फ्री AVAILABLE है,

कुछ लोगो के लिए कुछ भी अच्छा सीखना थोडा बोरिंग हो सकता है, लेकिन इतना बोरिंग नहीं हो सकता, जितना कि रैट रेस या चूहा दौड़ में फसे आदमी की लाइफ बोरिंग होती है,

इसलिए, समय निकालिए, कुछ नया सीखने के लिए अपने आप को तैयार करिए, क्योकि अगर आप कुछ नया नहीं सीखते तो आप इस दुनिया में सही तरह से फिट नहीं हो पाएंगे, यहाँ जिन्दगी हर रोज कुछ न कुछ सिखाने की कोशिस करती है,

मेरी माने तो किताबो से दोस्ती करिए, फेसबुक से नहीं,

कुछ अच्छी जिनसे आप बहुत कुछ सिख सकते है, वे किताबे है –

  • रिच डैड पुअर डैड,
  • थिंक एंड ग्रो रिच,
  • सीक्रेट्स ऑफ़ मिल्लिओनेर माइंड,
  • द रिचेस्ट मैन इन बेबीलोन,
  • कैश फ्लो quadrant, (रिच डैड सिरीज)
  • गाइड to इन्वेस्टिंग, (रिच डैड सिरीज)
  • रिटायर यंग रिटायर रिच, (रिच डैड सिरीज)

इसके अलावा, अगर आपके पास समय की कमी है, तो आप Youtube पर फाइनेंसियल सब्जेक्ट के ऊपर विडियो देख सकते है, ऑडियो बुक सुन सकते है, –

बहुत सारे लोग फाइनेंसियल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए इस टॉपिक के ऊपर बहुत अच्छा काम कर रहे है,

YOU TUBE पर मेरे कुछ favorite चैनल है –

  • Finnovationz.com
  • Asset Yogi, और
  • हिंदी ऑडियो बुक,

और इसके आलावा हमारे इस youtube चैनल, हिंदी फाइनेंसियल एजुकेशन, का तो उद्देश्य ही यही है कि – ज्यदा से ज्यादा फाइनेंसियल नॉलेज को सिम्पल भाषा में आप तक पहुचाई जाये,

याद रखिए

सीखना कभी बंद नहीं होता है, लर्निंग एक जर्नी है और कभी ऐसा नहीं होता कि आप ये कहे कि मै सब कुछ सीख चूका हु, इसलिए सीखते रहे और आगे बढ़ते रहे,

जितनी ज्यादा आपके पास फाइनेंसियल नॉलेज यानि आर्थिक समझ होगी, आप उतना ही बेहतर निर्णय ले पाएंगे, और फाइनेंसियल प्रॉब्लम से बाहर निकल पाएंगे, और साथ किसी तरह की फाइनेंसियल प्रॉब्लम में फसने से बच पाएंगे,

जैसे मैंने कहा अपने आपको फाइनेंसियल educate करने के दो रस्ते है, पहला रास्ता कि आप फाइनेंस के बारे में लगातार सीखते रहे और आगे बढ़ते रहे,

और दूसरा सिम्पल सा रास्ता है कि –

जो रोबर्ट कियोसाकी ने अपनी किताब रिच डैड पुअर डैड में बताया हुआ है –

और वो ये है कि – रैट रेस से बाहर निकलने के लिए अपनी एक्टिव इनकम से दोगुना आपको अपना पैसिव इनकम या पोर्टफोलियो इनकम बनाना होगा,

जैसे – अगर सैलरी से 10 हजार रूपये एक्टिव इनकम कमाते है तो आपका पैसिव इनकम और पोर्टफोलियो से कम से कम 20 हजार का इनकम सोर्स यानि कैश फ्लो बना लीजिए, 

और इस तरह का जब आपके पास आपकी जरूरत से दोगुना पैसिव इनकम आता रहता है तो आप लाइफ अपनी शर्तो पर जी सकते है, और अपने सपनो को खुल के पूरा कर सकते है, और रैट रेस से बाहर निकल सकते है,

अब सवाल ये आता है कि –एक्टिव इनकम के डबल अमाउंट के बराबर पैसिव इनकम या पोर्टफोलियो इनकम कैसे कमाया जाये,

तो इसके लिए रोबर्ट कहते है कि –

आप जो भी पैसा कमाते है, चाहे सैलरी से हो या बिज़नस, आपको अपने कमाए पैसे को आपको सिर्फ सिर्फ दो चीजो पर ही खर्च करना है –

पहला – अपनी जरूरत पर न कि इक्क्षा और फिजूलखर्ची पे,

और दूसरा – पॉजिटिव इनकम देने वाले एसेट खरदीने में,

जी हा आपको अपने पैसे से हमेशा एसेट यानि सम्पति ही खरीदना चाहिए,  और लिबिलीटी या दायित्व को खरीदना अवॉयड करना बेहतर है,

और ध्यान दीजिए कि एसेट यानि सम्पति का मतलब होता है जो आपकी जेब में पैसा डाले और लिबिलीटी यानि दायित्व का मतलब होता है कि जो आपकी जेब से पैसा निकाले,

सिर्फ – ये दो काम करके – सिर्फ जरुरत पे खर्च और इनकम देने वाले एसेट खरीद कर भी कोई भी रैट रेस से बाहर निकल सकता है,

ये बहुत सिम्पल और आसान लगता है न,

जी हा दोस्तों, रोबर्ट की सलाह बहुत ही सिंपल और आसान लगता है, लेकिन असली चुनौती है – एसेट और LIBILITIES को समझना और सिर्फ एसेट खरीदना,

अगर आप ध्यान से देखे तो जो लोग फाइनेंसियली संघर्ष कर रहे है, उनके पास ऐसी सम्पति न के बराबर होगी, जहा से उनकी जेब में पैसे आते हो,

जबकि उनके पास ऐसे बहुत सारी चीजे होंगी जो उन्होंने सम्पति समझ कर ख़रीदा होगा लेकिन वास्तव में वह दायित्व होता है जो उनकी जेब से पैसे निकलता रहता है जिसके कारण वे फाइनेंसियली संघर्ष करते है,

तो अगर आप आसान तरीके से फाइनेंसियल फ्रीडम हासिल करना चाहते है और रैट रेस से बाहर निकलना चाहते है तो आपको रोबर्ट की इस रैट रेस से बाहर निकलने वाले फोर्मुले एसेट और लिबिलिटी वाले फोर्मुले के बारे में जरुर सही तरह से सीखना चाहिए ,

RAT RACE – SUMMARY

हम में से ज्यादातर लोग जो एक रैट रेस में फसे हुए है, और अगर उसमे से कोई भी आदमी, जो  फाइनेंसियल प्रॉब्लम यानि रैट रेस से बाहर निकलना चाहता है ,

तो उसे अपने आपको फाइनेंसियली educate करते रहना होगा , उसे लगातार पैसे से जुड़े विषय और निवेश के बारे में सीखते समझते रहना होगा,

और जब किसी आदमी की पैसिव इनकम और पोर्टफोलियो इनकम उसकी एक्टिव इनकम का दोगुना हो जाए तो वह आदमी रैट रेस से बाहर निकल जाता है,

अब अगर आप नहीं जानते किएक्टिव इनकम, पैसिव इनकम और पोर्टफोलियो इनकम क्या होता है और कैसे काम करता है तो आप नीचे इस विडियो में दिए लिंक से जाकर इनकम के टाइप्स वाला मेरा पुराना विडियो जरुर देखे,

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